एक पल की

एक पल की ये बात नहीं, दो पल का ये साथ नहीं, कहने को तो जिन्दगी जन्नत से प्यारी है, पर वो साथ ही क्या जिसमे तेरा हाथ नहीं.

0 comments:

Post a Comment